WHO (World Health Organization ) ने चीन को मलेरिया मुक्त घोषित किया
मच्छर जनित बीमारी को खत्म करने के 70 साल के प्रयास के बाद, विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा 30 जून, 2021 को चीन को मलेरिया मुक्त रूप में प्रमाणित किया।
महत्वपुर्ण मुख्य बिंदु :-
- मलेरिया के विरुद्ध चीन की मुहीम वर्ष 1950 में शुरू हुई जिसके तहत घरों में कीटनाशक का छिड़काव किया गया।
- वर्ष 1967 में चीन द्वारा शुरू किए गए वैज्ञानिक कार्यक्रम की वजह से सबसे प्रभावी मलेरिया-रोधी दवा आर्टीमिसिनिन (Artemisinin) का अविष्कार हुआ।
- चीन में वर्ष 1940 से प्रतिवर्ष 30 मिलियन लोग मलेरिया से ग्रसित हुए, लेकिन 2018 से अब तक मलेरिया का एक भी मामला चिह्नित नहीं किया गया है।
- इससे पहले WHO द्वारा अल सल्वाडोर, अल्जीरिया और अर्जेंटीना और पराग्वे और उजबेकिस्तान को क्रमशः 2021, 2019 और 2018 में मलेरिया मुक्त घोषित किया गया।
- ऑस्ट्रेलिया – 1981 , सिंगापुर – 1982 और ब्रुनेई – 1987 में मलेरिया मुक्त घोषित हो चुके हैं ।
- WHO द्वारा जारी वर्ल्ड मलेरिया रिपोर्ट के अनुसार, मलेरिया के कारण वर्ष 2000 में 7,36,000 लोगों की मौत हुई थी। वहीं 2018 में लगभग 4,09,000 लोगों ने मलेरिया के कारण अपनी जान गवाईं।
- अफ्रीका में विश्व की लगभग 90% मलेरिया से होने वाली मौतें होती हैं।
- यह रिपोर्ट 87 देशों और क्षेत्रों में चल रहे मलेरिया संचरण के आंकड़ों पर आधारित है।
मलेरिया के बारे में मुख्य तथ्य :-
- मलेरिया एक जानलेवा मच्छर जनित रक्त रोग है जो प्लास्मोडियम परजीवी के कारण होता है।
- यह मुख्य रूप से अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और साथ ही एशिया के उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाया जाता है।
- परजीवी संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छरों के काटने से फैलता है।
- मानव शरीर में प्रवेश करने के बाद, परजीवी शुरू में यकृत कोशिकाओं के भीतर गुणा करते हैं और फिर लाल रक्त कोशिकाओं (आरबीसी) पर हमला करते हैं जिसके परिणामस्वरूप उनका टूटना होता है।
- 5 परजीवी प्रजातियाँ हैं जो मनुष्यों में मलेरिया का कारण बनती हैं और इनमें से 2 प्रजातियाँ – प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम और प्लास्मोडियम वाइवैक्स – सबसे बड़ा खतरा हैं।
0 टिप्पणियाँ